समता और विषमता : अमीर और गरीब : हिंदी कहानी

मारवाड़ राज्य के छोटे से एक गांव की बात है. वहां एक गरीब कुम्हार रहता था. मारवाड़ में एक बार भयानक अकाल पड़ा. इस की वजह से लोग तड़प-तड़प कर मरने लगे. गरीब कुम्हार पर विपत्ति टूट पड़ी. वह और उसका परिवार भूख मरने लगे. तो वह कुम्हार भरण पोषण का उपाय करने के लिए, किसी तरह व्यवस्था करके वह घर से निकल पड़ा. उसका बचपन का मित्र दिल्ली में रहता था और व्यापार करता था. खूब बड़ा व्यापार चलता था. कुम्हार को उसकी याद आ गयी. वह दिल्ली पहुंच गया. “विपत्ति कल कर सतगुन नेहा” उसे पूरा भरोसा था कि मित्र के यहां सहस आदर होगा. दु:ख के दिन कट जाएंगे. मित्र से मिला, मित्र ने उसका स्वागत किया. परंतु उदास व अपफुल्लता के साथ कुछ झुँझलाहट से चेहरे के साथ उसने करुणा से संक्षेप में अकाल का सारा किस्सा सुनाया. आश्रय की भीख मांगी और कहा भाई घर में आपकी भाभी और बच्चे भूखे मर रहे हैं. उनके लिए आज कुछ खर्च भेजना आवश्यक है. मेरे लिए कोई काम का प्रबंध होना चाहिए. धनी मित्र लंबी सांस खींचकर कहा- भाई साहब, आप की सेवा करनी चाहिए परंतु मेरी ना तो इतनी आमदनी हैं कि सहायता कर सकूं. आजकल ना कोई काम है. पूंजी के बजाय से मकानों के किराए और व्यापार से कुल 40 से 50 हजार आते होंगे. आप जानते हैं कि आजकल महंगाई कितनी है. अपनी इज्जत के अनुसार खर्च भी करना ही पड़ता है. इसलिए मुझमें कहां शक्ति है, परबाध्य होकर कहना ही पड़ता है. कि मुझसे इस समय कोई नहीं बन पड़ेगा. उसने मना कर दिया.

वह कुम्हार उस शहर में किसी को जानता भी नहीं था. इसलिए उसके उदास होकर कहा, कि कोई तो प्रबंध कर दीजिए. मैं तो काम मांग रहा हूं. मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करूंगा. कहते हुए, उसकी आंखों में आंसू छलक पड़े. उसके चेहरे को धनीमित्र ने देखा पर उसका हृदय नहीं पिघला,आपका कहना तो ठीक है अर्थात यह है कि मैं लाचार हूं. अब दूसरा उपाय ही सोचना पड़ेगा. दो-चार दिन जब तक आपके काम की कोई व्यवस्था न हो. आप यहां ठहर जाए. घर मे चाय पीये. गरीब कुम्हार बेचारा मन ही मन जाने क्या विचार करता शोच-स्नान करने लगा.

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धनी मित्र तो रुखा और कंजूस स्वभाव का था ही उसकी पत्नी कैसी होगी! उसने अंदर जाकर पत्नी से कहा मारवाड़ से मेरे एक पुराने धर्म भाई को भोजन करना है. यह सुनकर उसकी पत्नी तड़पकर, “भाड़ में जाएं मित्र अतिथी” रोज एक न एक आफत लगी ही रहती हैं. मुझसे यह सब नहीं होगा. पति ने फुसलाकर चुपके से कहा, ‘अरे जरा धीरे से तो बोलो वे बाहर ही खड़े हैं सुन लेंगे तो’ तो और भी अच्छा होगा. दो चार दिनों मैं चला जाएगा. इतने दिन किसी तरह अपनी इज्जत के अनुसार उन्हे भोजन करना होगा. पत्नी ने बात मान ली और अब भोजन बनाया. परंतु मन में कष्ट तो बना ही रहा.

भोजन तैयार कर के भोजन पर बुलाया, अंदर आते ही पत्नी ने कहा, पहले अपने मित्र को भोजन करा दीजिए. अतिथि पहले भोजन करना धर्म है. भोजन में चीनी डाली हुई  बढ़िया खीर, पूरी, दही और कई तरह की तरकारियां, परंतु भोजन कराने वालों के चेहरे पर कोई लाश या मिठास नहीं था. गरीब अतिथि चुपचाप भोजन कर लिया. परंतु भूख मुद्रा देख कर उसे सुख नहीं मिला. भोजन करने के बाद लघुशंका के लिए बाहर गया. उसके पत्नी अपने पति के भोजन कराते समय उससे अच्छा व स्वादिष्ट भोजन करवाया. यह सब उस अतिथि ने देख लिया. इसी विषमता के कारण मुझे साथ में भोजन नहीं करवाया. रात्रि का समय हुआ, धनी मित्र तो अंदर सो गया और उस गरीब अतिथि के लिए बाहर जहा मच्छर व खटमल थे वहां सोने का बिस्तर लगा दिया. लेटते ही कतार की कतार बाहर आ गई और मच्छरों के उड़ाने में रात बीत गई. बेचारा घड़ी भर भी ना सो पाया.

दूसरे दिन घर से निकलकर बाजार की ओर गया, चौराहे पर पहुंचते ही उसे अपने गांव का एक परिचित मनुष्य दिखाई दिया. उसने भी इनको देख लिया, वह बहुत गरीब था पर था बड़ा सहृदय, दौड़कर पास आया बड़े प्रेम से उल्लास से पूछने लगा मुझे कोई खबर होती तो स्टेशन चला आता. आप ठहरे हैं ? कहो हो चलिए घर,मे आप सामान ले आता हूं. विदेशों में भले घर के प्रेमी पुरुष कहा मिलते हैं उसे बड़ा आश्वासन मिला मानो डूबते को सहारा मिल गया. उसने अपना जहां ठहरा था. उस धनी सेठ के बारे में सब कुछ बता दिया यदि आप मुझे अपना मानते हो तो मेरे साथ मेरे घर पर चलो. दोनों साथ-साथ घर चले जाते हैं. तो गरीब ही भारी बताने में फुटकर चीजों की रसीद बिकरी का काम करता हूं. रोज के ₹2 कमा लेता हूं. आप रहेंगे तो हम 2 जाएंगे आमदनी दोगुनी हो जाएगी. ₹50 मासिक घर भेज देंगे. ₹50 मेरे पास पहले के हैं, इन्हें आज ही मनीआर्डर घर भेज दो. छोटा सा घर है मेरा, मैं ,वह और उसकी पत्नी रहते थे एक चारपाई गरीब कुम्हार को सुखमय बड़ा आश्वासन मिला. फिर गरीब दुकानदार, सेठ के यहां जा कर उसका सामान ले आया.

अपनी पत्नी को कहते हुए की अपने देश से एक सज्जन आए हैं. अपने परिचित भी हैं. उनके लिए भोजन बनाओ पत्नी बड़ी साध्वी थी. उसने प्रेम से रसोई में मोटे चावल, तरकारी, रुखी रोटी आदि बनाया समान भाव से दोनों ने भोजन किया.इसी प्रकार अकाल पीड़ित उसके घर पर रहने लगा. वहां प्रेम सहित भोजन करता चारपाई पर सोता और गरीब दुकानदार की पत्नी ने अपनी मलमल की ओढ़नी रात को सोते समय उड़ने को दे दी.

तीन-चार दिन दिनों बाद एक दिन रास्ते में धनी मित्र के साथ अकाल पीड़ित भाई की भेंट हो गई. धनी मित्र ने कहा, काम की व्यवस्था हो गई ? तो उसने जवाब दिया, अपने देश के  अमुक दुकानदार के यहां रहता हूं. उसने अपने काम में मुझे साझेदार बना लिया. उसके ही घर पर रहने का प्रबंध हो गया. अभी मेरे बच्चों के लिए कम से कम ₹50 प्रतिमा बाल बच्चों के लिए घर भेज दिए जाएंगे. खाने पीने की बड़ी अच्छी व्यवस्था है यहां अमृत तुल्य भोजन मुझे बड़ी ही तृप्ति मिलती है. इतना अच्छा प्रेम भरा समता का व्यवहार है. रात को मैं सुख से ओढ़नी मछहरी की परम सुखप्रद है. गरीब निर्धन होते हुए भी मुझे आश्रय दिया. मेरी सहायता की ₹50 तुरंत भेज दिए. गरीब कुम्हार कहता है कि, उसके उपकार को कैसे भूल सकता हूं!

धनी मित्र ने पूछा,  मेरे यहां आपको किस बात की विषमता दिखलाई और गरीब निर्धन के यहा क्षमता कैसे थी. इस पर उसने कहा, आपके यहां मुझे बहुत बढ़िया भोजन पदार्थ मिले, वे विष के तुल्य हो गए. आपको स्मरण होगा, मुझे अतिथि बतलाकर पहले अकेले भोजन कराया गया. मैं लघुशंका के लिए बाहर गया, मैं हाथ धोने लौटा तो मेरी दृष्टि आपके भोजन पदार्थों की ओर चली आपके लिए बदाम का हलवा, मक्खन, पतले-पतले फूल्के, दही, गोभी आदि अच्छे पकवान थे. परंतु मेरे भोजन से विषम थे. मुझे सब नहीं परोसी गई. यह सब भेद ना करके आपने साथ भोजन करवाना था. इसी विषमता के कारण आपका भोजन विष हो गया.

उधर उसका व्यवहार देखिए वह बेचारा बड़ा गरीब है. पर उसकी पत्नी मोटे चावल, रूखी-सूखी रोटियां, तरकारी, छाज बड़े आदर प्रेम से तथा उल्लास प्रसन्नता से भोजन करवाया. रात के सोने के लिए चारपाई टाट का बिछड़ना ओढनी की मछहरी तान दी. मैं तो वहां प्रेम और समता के कारण अमृत पाता हूं. धनी मित्र के पास कोई उत्तर नहीं मिला था. अपनी व्यवहार क्षमता तथा प्रेम हीनता के कारण मन ही मन पछताने लगा सिर नीचा करके वहां से चल दिया. एक कल्पित दृष्टांत है इससे हम हमको सीखना चाहिए कि सबके साथ प्रेम और विनय से युक्त त्याग तथा उदारता बर्ताव करें. सब को यथायोग्य अनुकूल आदर सत्कार पूर्वक विन्य और प्रेम पूर्वक बिना किसी भेदभाव के साथ नियत शुद्ध होनी चाहिए. आपके मन में जरा भी विस्मय नहीं होनी चाहिए.

लेखक-राजकुमार

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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