सच्ची प्रार्थना : बाल कथा

क गांव के किनारे एक तालाब था. तालाब बहुत गहरा था इसीलिए उसका पानी कभी नहीं सूखता था. तालाब में तरह-तरह की रंग-बिरंगी मछलियां और मेंढक थे.

गांव के लोग अपने तालाब की मछलियों को कभी नहीं मारते थे बजाये इसके मछलियों को खाने के लिए वहां के लोग आटे की गोलियां बनाकर तालाब में डाला करते थे. तालाब में मछलियां और मेंढक बड़ी शांति से रहते थे.

एक बार गर्मी के मौसम में पानी नहीं बरसा. तालाब का पानी सूखने लगा. मेंढक और मछलियां व्याकुल रहने लगे. तालाब में कम पानी रह जाने से नीचे का पानी गर्म हो गया और मछलियों को बड़ा कष्ट होने लगा.

एक दिन तालाब के किनारे पीपल के पेड़ पर बैठे पक्षी भी ठंडे स्थान की ओर भागने लगे. मछलियां कहां जाती 2 दिन में सारे तालाब सुखना शुरू हो गया.

तालाब में एक मेंढक था. वह कहीं नहीं गया. उसके साथियों ने कहा भी पर उसने अपनी जन्म भूमि को छोड़ कर जाना पसंद नहीं किया.

एक मछली ने उससे कहा- “मेंढक भाई! तुम क्यों नहीं गए.”

मेंढक ने कहा, “मुझे अपनी जन्मभूमि बहुत प्यारी है. मैं इसी तलाब में जन्मा और बड़ा हुआ हूं दुख-सुख में तुम लोगों ने मेरा साथ दिया है. भला तुम लोगों को कैसे छोड़ सकता हूं.”

“मेंढक भाई! हम मछलियां तो मजबूर है. हम तो आपकी तरह कूदकर जा भी नहीं सकती मगर तुम तो कहीं जा कर अपने प्राण बचाकर जीवन पा सकते हो.” मछली बोली.

मेंढक बोला, “मैं तुम लोगों का साथ छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा. हमें ईश्वर पर विश्वास रखना चाहिए. वह सब पर कृपा करता है. दुखी की प्रार्थना में बड़ा बल होता है.”

एक बालक यह सब सुन रहा था. उसने गांव में जाकर सब को यह बात बताई. जीव जंतुओं को भी अपनी माटी से अगाध प्रेम होता है. आओ बरसात के लिए हम भी ईश्वर से प्रार्थना करें.

गांव वालों और जीवन की सच्ची प्रार्थना से वर्षा हुई और तालाब फिर से पानी से भर गया.

शिक्षा– मातृभूमि से बढ़कर कहीं और स्वर्ग नहीं है हमें हमेशा धीरज रखना चाहिए.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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