शर्त : जीवन के मूल्य

एक शहर में एक व्यवसायी के यहां दावत थी. बहुत से लोग दावत में आए थे. बातों-बातों में बात चल पड़ी कि मौत की सजा भयंकर या उम्र कैद. इस पर व्यवसायी ने कहा कि पल-पल मरने से तो अच्छा है कि फांसी लगाकर मार दिया जाए.

इस पर दावत में उपस्थित एक सज्जन जो कि एक लिपिक था उसने अपनी राय व्यक्त की कि जिंदगी के हर पल को जीना चाहिए. ऐसे ही एक पल में अपनी जिंदगी समाप्त नहीं करनी चाहिए. इस पर व्यवसायी क्रोधित हुआ और उसने लिपिक से शर्त लगाई कि मैं तुम्हें पचास लाख रुपए इनाम दूंगा यदि तुम 2 साल भी एक बंद कोठरी में व्यतीत करो.

लिपिक ने शर्त को स्वीकार करते हुए कहा कि मैं 5 वर्ष तक एक बंद कोठरी में रह सकता हूं.
व्यवसायी ने कोठरी में सभी व्यवस्थाएं खाने-पीने, पुस्तकें, वाद्ययंत्र, धर्मशास्त्र आदि करवा दी. लिपिक ने शर्त अनुसार पहला वर्ष आराम करने में खाने-पीने में, दूसरा वर्ष पुस्तकें पढ़ने में, तीसरा वर्ष वाद्ययंत्र में, चौथा वर्ष धर्म शास्त्र के अध्ययन में तथा पांच वर्ष के अंत तक उसने सभी धर्म शास्त्रों का ज्ञान अर्जित कर लिया.

लगभग 5 वर्षों तक कोठरी में रहने के कारण लिपिक की शारीरिक स्थिति बहुत ही कमजोर हो चुकी थी. अब उसका 5 वर्षों का सफर पूरा होने को था. उधर व्यवसायी चिंतित था कि अब उसको लिपिक को पचास लाख रुपए देने होंगे तो वह उसे कोठरी में देखने गया.

लिपिक बहुत ही कमजोर हो चुका था. वह कुर्सी पर सोया हुआ था. व्यवसायी चुपके से कोठरी के अन्दर गया. उसने सोचा कि यदि में लिपिक का गला दबा दूं तो इसकी मृत्यु स्वभाविक रही होगी व्यवसायी उसके पास पहुंचा. वहां मेज पर एक पत्र पड़ा हुआ था. उसे व्यवसायी ने पढ़ा जिसमें लिखा था कि मेरी समय अवधि पूर्ण होने से पूर्व ही मैं इस कोठरी से बाहर चला जाऊंगा तथा अपनी शर्त की राशि भी में व्यवसायी से नहीं लूँगा क्योंकि मैं समझ गया हूं कि जितना भी समय मैंने कोठरी में व्यतीत किया है प्रकृति से दूर रहकर उस अभाव की पूर्ति कोई भी धनराशि नहीं कर सकती.
व्यवसाय को अपनी सोच पर बहुत ही अफसोस हुआ.

सुबह लिपिक शर्त से 5 मिनट पूर्व ही कोठरी से बाहर चला गया तथा व्यवसायी ने उस पत्र को संभाल कर अपनी अलमारी में रख लिया.

शिक्षा: जीवन जीने का आनंद स्वतंत्रता में ही है.
पिंजरे में बंद पक्षी को सभी सुविधाएं पिंजरे में प्रबंध होने के बावजूद भी वह खुले आकाश में स्वतंत्र और ना ही पसंद करेगा.
जीवन के हर क्षण को पूर्ण उत्साह एवं आजादी के साथ जीना चाहिए

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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