विश्वासघात का फल : हिंदी कहानी

मानसिंह एक छोटी रियासत का मालिक था. वह बड़े नेक स्वभाव का था. उसे शिकार करने का बहुत शौक था.

एक दिन वह हिरणों का शिकार कर रहा था. उसे काला हिरण दिखाई दिया. उसने अपना घोड़ा उसके पीछे दौड़ा दिया. वह हिरण छिपते-छिपाते भागता दूर निकल गया. ठाकुर मानसिंह उस हिरण को मारने में असफल रहा.

अंधेरा होने लगा था. ठाकुर को प्यास भी लग रही थी. अब ठाकुर हिरण का पीछा छोड़ पानी की तलाश में लग गया. उसे दूर एक तालाब दिखाई दिया. वह घोड़े से उतरा और घोड़े को वही पेड़ से बांधकर उसने तालाब का पानी पिया.

पानी पीकर ठाकुर मानसिंह जैसे ही मुड़ा, देखता है कि एक शेर शीघ्रता से उधर ही आ रहा था. शेर के डर से घोड़ा रस्सी तोड़कर भाग गया था. अब ठाकुर को अपनी जान बचाने के लिए पास के पेड़ पर चढ़ना पड़ा.

उस पेड़ पर पहले से ही एक भालू बैठा था. ठाकुर इस भालू को देखकर बीच में ही रुक गया उसने मन में सोचा अगर पेड़ पर चढ़ता हूं तो भालू खा जाएगा यदि पेड़ के नीचे उतरता हूं तो शेर खा जाएगा.

अब ठाकुर त्रिशंकु की भांति बीच में ही रुक गया. ठाकुर को अपने से डरा जान भालू ने कहा- “ए भाई! तुम मेरी शरण में आए हो. मेरा फर्ज है कि मैं तुम्हारी रक्षा करूं. अतः निडर होकर ऊपर आ जाओ.”

भालू के वचन सुनकर ठाकुर मानसिंह पेड़ पर चढ़ गया. शेर भी आकर पेड़ के नीचे रुक गया. वह जाने का नाम ही नहीं ले रहा था.

रात हो गई थी. थका होने के कारण ठाकुर को नींद आने लगी तब भालू ने कहा-“ऐसे नीचे गिर जाओगे अत्यंत रो कर मेरी गोद में सो जाओ” ठाकुर ने ऐसा ही किया. शीघ्र ही वह गहरी नींद में सो गया.

ठाकुर को सोया देख शेर ने भालू से कहा- “तुमने शत्रु को अपनी गोद में सुलाया हुआ है. दिन निकलते ही वह तुम्हें मार देगा. तुम इसे नीचे गिरा दो ताकि मैं उसे मार कर भूख मिटा कर घर चला जाऊं”

तब भालू ने कहा- “जो शरण में आए हुए के साथ विश्वासघात करता है वह जीवन भर घोर नरक में सड़ता है. मैं इसे नीचे नहीं गिराऊँगा.”

यह सुनकर शेर निरुत्तर हो गया. थोड़ी देर बाद ठाकुर नींद से जागा. तब भालू ने कहा- “हे दोस्त! अब मैं सो जाऊं, तुम सावधान रहना. इतना कहकर भालू सो गया.

भालू को सोया देख शेर ने ठाकुर से कहा- “इस भालू पर तुमने विश्वास कैसे कर लिया. दिन निकलते ही यह तुम्हे मार देगा. तुम इसे नीचे गिरा दो ताकि मैं इसे खाकर घर जाऊं.”

ठाकुर ने क्षण भर सोचा. शायद शेर ठीक ही कह रहा है यह सोचकर ठाकुर ने भालू को जोर से नीचे गिरा दिया. किंतु बालों ने शीघ्र ही पेड़ की शाखाओं को पकड़ लिया. भालू नीचे गिरने से बच गया.

उसी समय भालू ने कहा- “रे पापी! तूने मेरे साथ विश्वासघात किया है. अब से तुम पागल होकर जंगल में भटकोगे.”

दिन निकल आया. शेर भी पेड़ के नीचे से चला गया और ठाकुर भालू के श्राप से पागल होकर जंगल में भटकने लगा.

शिक्षा:
समुन्द्र का किनारा हो या गंगा-यमुना का संगम यदि हम इन जगहों पर ब्राह्मण को मार दे तो वह भी पाप से छूट सकता है किंतु मित्र होने के साथ विश्वासघात करने वाला मनुष्य पाप से मुक्त नहीं हो सकता.
जो मित्र के साथ विश्वासघात करता है वह नीच है और तीन जन्म तक घोर नरक में पड़ता है.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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