राजा और कौआ : एकता का लाभ

एक बार एक राजा था. राजा के दो पु़त्र थे. एक दिन ऐसा आया की राज्य में अकाल पड़ गया. अनाज खत्म हो जाने पर राजा ने अपना राज्य छोड दिया और अपने पुत्रों के साथ जंगल कि ओर चल पडा.

चलते-2 राजा को थकान हूई तो उसने आराम करने का सोचा ओर सुरक्षित जगह रूक गए. आराम करने बाद राजा ने अपने बेटों से कहा- कहीं से खाने का इंतजाम किया जाए. राजा ने एक बेटे को कहा- तुम जा कर लकड़ी लेकर आओ और दूसरे बेटे को कहा- तुम पानी लेकर आओ. राजा के दोनों लड़के अपने-अपने काम पर लग गए. और राजा ने कुछ रस्सी के टुकडे़ लिए और उनको जोड़ने लगा.

एक पेड़ पर बैठा कौआ राजा को देख रहा था. कौए ने राजा से कहा- आप इस रस्सी को जोड़कर क्या करोगे राजा ने कौऐ से कहा- तुझे इस रस्सी से पकड़गें. इतने में राजा के दोनों बेटे भी लकड़ी और पानी लेकर आ गए.

कौए ने राजा के एक बैटे को पुछा – तुम इस पानी का क्या करोगे. उसने कहा- हम तुम्हें इस पानी डूबों कर मारेगें.

फिर कौए ने राजा के दूसरे बेटे से पुछा- तुम इन लकड़ीयों का क्या करोगे. राजा के दूसरे बैटे ने कहा- हम तुम्हें इस लकड़ीयों में पकाकर खाऐगें. कौऐ ने सोचा की राजा के दोनों बेटे राजा का कहना मान रहे हैं. हो सकता है ये सब मिलकर मुझे पकड़ सकते हैं.

कौए ने राजा से कहा- अगर मैं आपको जमीन के अन्दर गड़े हुए धन के बारे में बता दूँ जिससे आपके राज्य का पालन-पोषण हो सके.

राजा ने कहा- ठीक है हम तुम्हें नहीं पकड़ेगें. यह सुनकर कौआ खुश हुआ और राजा को एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे ले गया जिस पेड़ के नीचे जमींन के अन्दर धन गड़ा हुआ था. कौए ने राजा को जमींन खुदवा कर धन निकालने को कहा.

राजा ने धन निकाला और वापस अपने राज्य में लौट आया. तो लोगों ने राजा से पुछा- यह सब कैसे हुआ. राजा ने अपनी सारी बात बताई. तब राज्य एक आदमी ने सोचा अगर राजा को ऐसा करने से धन मिल सकता है तो मुझे क्यों नहीं. यह सोचकर वह आदमी भी अपने पुत्रों को साथ लेकर जंगल मे चला गया. और उसने राजा की तरह अपने एक पुत्र से कहा- जा कर पानी लेकर आ.

तो पुत्र ने उल्टा अपने पिता को कहा पानी में डूबना है क्या. फिर उस आदमी ने अपने दूसरे पुत्र से कहा- तुम जा कर लकड़ी लेकर आओं तो दूसरे पुत्र ने कहा- लकड़ियों में जलना है क्या.

उस आदमी के दोनों बेटे उसका कहना नहीं मान रहे थे. और कौआ पेड़ पर बैठ उनको देख रहा था कौए ने उस आदमी से कहा- कि वो राजा ही था जिसके दोनों बेटे उसका कहना मान रहे थे और वो मुझको मिलकर पकड़ सकते थे इसलिए मैंने राजा को धन के बारे में बताया. तुम्हारे बेटे तुम्हारा कहना ही नहीं मान रह हैं तो आप मुझे मिलकर कैसे पकड़ सकते हो.

यह कहकर कौआ उड़ गया और वह आदमी वापस लौट आया.

कहानी से शिक्षा : मिलकर रहने से हर मुश्किल का सामना कर सकते है

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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