बालक का स्वप्न : हिंदी कहानी

किसी सेठ के यहां एक लड़का नौकरी करता था. एक रात वह अचानक स्वपन में चिल्ला उठा- “अहो मेरा भाग्य!”

सेठ ने सुना तो सेठ ने बालक को जगाकर पूछा- “क्यों चिल्ला रहा था?’

उस लड़के ने कुछ नहीं बताया और बात बदल गया. उस स्वप्न के बाद वह लड़का छिप कर पढ़ने लगा. एक दिन उस सेठ ने कहा कि या तो तुम मुझे स्वप्न की बात बता दे, यहां कोई नहीं है या फिर मेरे यहां से काम करना बंद कर दे.”

लड़का चतुर और होशियार था. उसने नौकरी छोड़ दी. उसने अपनी पढ़ाई चालू रखी इसी बीच उसे किसी जमीदार के यहां नौकरी मिल गई.

एक दिन वह सेठ जमीदार के यहां किसी काम से आया और उसने वहां लड़के को काम करते देखा.

सेठ ने जमींदार को सारी बात बताई इस पर जमींदार ने उस लड़के को बुलाकर स्वपन के बारे में पूछा लड़के ने कुछ नहीं बताने पर जमींदार ने उसे काम से निकाल दिया कुछ दिन बाद वह सूझबूझ से राजा के यहां साधारण नौकर बन गया और फिर धीरे-धीरे उन्नति करते हुए राजा का मंत्री बन गया.

इत्तेफाक से एक दिन वह जमीदार राजा के यहां आया और उस लड़के को देख उसने अपनी सारी बात राज्यों को बताई राजा ने उसे बुलाकर पूछा परंतु मंत्री अर्थात उस लड़के ने स्वपन को बताने से इंकार कर दिया राजा नाराज होकर मंत्री को कोठरी में बंद कर दिया.

कुछ समय बाद पड़ोसी राजा ने इस राजा तथा मंत्रियों की चतुराई जाने के लिए दो घोड़ियाँ भेजी और पुछवाया कि इनमें से मां कौन सी है और बेटी कौन सी है?

कोई भी समस्या को हल नहीं कर सका. मंत्री (उस लड़के) के कानों तक यह बात पहुंची और उसने कहा कि दोनों को नदी में नहलाने ले जाओ जो पहले नदी में घुसे वही मां है और जो पीछे चलेगी वह बेटी होगी.

इस तरह यह समस्या हल हुई और पड़ोसी राजा ने कुछ ओर प्रश्न राजा को भेजें, मंत्री ने सारे प्रश्न हल कर दिए. इन सब से प्रसन्न होकर पड़ोसी राजा ने संदेश भिजवाया कि जिस किसी ने भी इन प्रश्नों का उत्तर दिया है मैं उससे मेरी कन्या का विवाह करूंगा.

राजा ने मंत्री को मुक्त कर दिया. हर जगह मंत्री की वाह-वाह होने लगी. राजा व पड़ोसी राजा द्वारा मंत्री को संपत्ति वह भेंटे मिली.

कुछ दिन बाद राजाओं, जमीदारों तथा सभी को उस लड़के ने आमंत्रित किया. वह विशाल एवं सुसज्जित कक्ष में लेटा थे. उसकी पत्नी उसके पास बैठी थी. सभी नौकर उसकी सेवा में जुटे थे, तब उस मंत्रीराज ने कहा-
“यही दृश्य जो आप सब देख रहे हैं, वही मैंने अपने स्वप्न में देखा था और तभी में स्वपन में चिल्लाया था “अहो मेरा भाग्य!” यदि यह बात में तुम लोगों को बता देता तो तुम इसे पूरा नहीं होने देते और शायद इर्ष्या, लालच और अपमान के वशीभूत मुझे मौत के घाट उतार देते”

कहानी से शिक्षा- कर्म, कठोरता, लगन और निष्ठा से कोई भी व्यक्ति महान बन सकता है.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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