नासमझी की बीमारी : हिंदी प्रसंग

क दिन की बात है, मैं रेलवे स्टेशन पर खड़ा था और ट्रेन का इंतजार कर रहा था. मैं जिस ट्रेन का इंतजार कर रहा था उसमें आरक्षण का कोई सिस्टम नहीं था.

प्लेटफार्म पर इतनी भीड़ थी कि यह बात स्पष्ट थी की जगह उसी को मिलेगी जो भीड़ को पछाड़कर सबसे पहले ट्रेन में चलेगा.

तभी घोषणा हुई कि जयपुर को जाने वाली गाड़ी 50 मिनट की देरी से प्लेटफार्म नंबर एक पर आएगी. इस घोषणा के बाद सभी यात्री आराम से बैठ गए एवं कुछ व्यक्ति नींद की मीठी-मीठी झपकिया ले रहे थे.

कुछ ही मिनट बाद एक व्यक्ति उठकर पश्चिम की तरफ आगे बढ़ा, जहां से ट्रेन आने वाली थी. तभी कुर्सी पर बैठे एक व्यक्ति ने अपने पास बैठे मित्र से कहा, “देखो वह व्यक्ति भी आगे गया है, शायद ट्रेन आ गई है. जल्दी चलो नहीं तो जगह नहीं मिलेगी.”

ऐसा कहकर वे दोनों व्यक्ति आगे की तरफ गए जहां पर ट्रेन रुकती है, उन दोनों व्यक्तियों को भागते हुए देख आराम से बेठी भीड़ में हलचल हुई, भीड़ भी उठ-उठ कर आगे की तरफ चली गई जहां ट्रेन रुकती है. भीड़ को देखकर मैं भी आगे बढ़ गया. आगे जाकर पता चला की ट्रेन नहीं आई, सबसे पहले जो व्यक्ति आगे की तरफ गया था वह तो ऐसे ही टहल रहा था.

उस दिन मुझे यह बात समझ में आई कि अगर ज्यादातर व्यक्ति एक ही दिशा में जा रही हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि वह सही दिशा में जा रहे हैं. उस दिन मुझे अपनी सोचने की क्षमता एवं निर्णय शक्ति पर संशय हुआ क्योंकि जब सब आगे की तरफ जा रहे थे तब मैं भी भीड़ के साथ-साथ आगे बढ़ा और मैंने एक पल के लिए भी इस बात पर गौर नहीं किया कि अभी-अभी रेलवे ने ये घोषणा की है कि ट्रेन 50 मिनट बाद आएगी.

दोस्तों! आज हमारी समस्याओं की एक वजह यह भी है कि हम स्वतंत्र रुप से नहीं सोच पाते एवं अपना निर्णय दूसरे व्यक्तियों द्वारा लिए गए निर्णय के आधार पर ही लेते हैं.

दोस्तों! कोई व्यक्ति या विद्यार्थी अपने करियर के बारे में निर्णय लेता है तो वह अपना निर्णय इस आधार पर लेता है कि उसके मित्रों ने कौन सा क्षेत्र चुना है अथवा उसके परिवार का सदस्य पहले से किस क्षेत्र में है या नहीं.

शिक्षा-
विद्यार्थियों को निर्णय स्वतंत्र रुप से अपनी रुचि के आधार पर ही लेना चाहिए. जिस तरह प्रत्येक व्यक्ति का स्वभाव एवं जीवन की परिस्थितियां अलग-अलग होती है उसी तरह एक ही प्रकार का निर्णय सभी व्यक्तियों के लिए सही नहीं हो सकता.

ज्यादातर बुरी आदतों एवं धूम्रपान करने वालों की धूम्रपान करने की शुरुआत भी स्वतंत्र सोच के अभाव के कारण ही होती हैं और वह धूम्रपान इसीलिए शुरू करता है कि उसका मित्र भी ऐसा ही कर रहे हैं.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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