नकलची नाई : हिंदी Whatsapp हास्य कहानी

नकलची नाई :  एक नाई था. उसके पड़ोस में एक ब्राह्मण रहता था. नाई की आदत थी कि जो ब्राह्मण करें वही वह भी करता था. ब्राह्मण अगर पूजा करें, माला फेरे तो नाई भी वैसा ही करता था. ब्राह्मण तिलक लगाए तो नाई भी तिलक लगाता था. इस तरह ब्राह्मण की नकल करके नाई ब्राहमण को चिढ़ाया करता था. ब्राह्मण ने सोचा कि इस नकलची नाई की अकल कभी ठिकाने लगानी चाहिए. सोचते-विचारते दिवाली आ पहुंची. दिवाली के दिनों में भी ब्राह्मण जो कुछ जिस तरह करता नाई भी वही करता. ब्राह्मण ने सोचा अब कोई तरकीब ही निकालनी पड़ेगी. ब्राह्मण ने अपनी स्त्री को अकेले में बुला कर कहा- “सुनो यह नाई रोज मेरी नकल करके मुझे चिढ़ाता है. इसलिए इसकी अकल ठिकाने लगाने के लिए मैंने एक तरकीब निकाली है. इसीलिए मैं आज शाम को तुम से कहूंगा, आज हम सब को 12:00 बजे अपनी नाक काट लेनी है और कल नई नाक के साथ दिवाली मनानी है. तुम कहना वाह नई नाकें! नई नाक के साथ दिवाली तो हम हर साल मनाते हैं. इस साल बहुत बड़ा मजा आएगा.”

खाने के बाद रात को ब्राह्मण ने बिस्तर पर लेटे-लेटे ही ब्राहमणी से कहा- “सुनती हो! कल दिवाली है आज रात 12:00 बजे तुम सब की नाक काटी जाएगी और कल सवेरे सबको नई नाक मिल जाएगी. बात समझ लेना.”

ब्राह्मणी बोली- “बहुत अच्छा! हम सब तो तैयार हैं.”

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ब्राह्मण दिखावा तो ऐसे कर रहा था जैसे वह ब्राहमणी से अकेले में ही सारी बात कह रहा हो पर असल में इतनी ऊंची आवाज में बोल रहा था कि नाई को भी सुनाई दे सके.

नाई तो पूरा पक्का नकलची था ही. इसीलिए उसके मन में भी विचार आया कि फ़िक्र की कोई बात नहीं मैंने सब कुछ सुन लिया है अगर ब्राहमण नहीं नाक से दीवाली मनाएगा तो हम भी वैसा ही करेंगे. ब्राह्मण को तो किसी का उस्तरा मांग कर लाना पड़ेगा लेकिन मेरे पास तो पहले से ही है. कल ही धार करवा कर लाया हूं. ब्राह्मण के मुकाबले में अच्छी तरह से नाक काट सकूंगा. इसलिए ब्राह्मण के घर में सब को जो नई नाक आएगी उससे मेरे घर में कहीं ज्यादा बढ़िया और अच्छी नाक आएगी

सब सो गए. आधी रात होने पर ब्राह्मण जागा और खटिया पर लेटे-लेटे ही उसने ब्राह्मणी से कहा सुनो तुम इधर आ जाओ. मुझे तुम्हारी नाक काटनी है. ब्राह्मणी भी खटिया पर लेटे-लेटे ही बोली- “लो मैं आ गई. अब नाक काट लो.”

मानो नाक कट चुकी हो. इस तरह तुरंत ही ब्राह्मणी हाय-हाय करके जोरों से रोने चीखने लगी.

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ब्राह्मण में लेटे-लेटे कहा- “रो मत मेरे पास आओ. मैं तुम्हें पट्टी बांध देता हूं. सवेरे दूसरी बढ़िया नाक आ जाएगी. ब्राह्मणी कू कू करती हुई सो गई. बाद में ब्राह्मण ने अपने बच्चों की भी नाक काटने का वैसा ही दिखावा किया. थोड़ी देर बाद सब बच्चे भी सो गए.

अब नाई नाक काटने के लिए तैयार हुआ. उसने सोचा ब्राह्मण ने तो सबकी ना काट ली है. अब हमें भी काट लेनी चाहिए. नाई ने अपनी पेटी में से उस्तरा निकाला और दबे पांव अपनी घरवाली की खाट के पास पहुंचकर बड़ी सफाई से उसकी नाक उड़ा दी. नाक कटते ही नाइन रोने चीखने लगी.

नाई ने उसका हाथ पकड़ कर कहा- “सुनो! चुप हो जाओ. चुप हो जाओ. आओ, मैं तुम्हें पट्टी बांध देता हूं. सुबह से तुम्हारी बढ़िया नाक जाएगी. ब्राह्मण ने भी सब की नाक काटी है वे लोग नई नाक के साथ दीवाली मनाने वाले हैं हमें भी उसी तरह दिवाली मनानी है.”

नाइन की नाक से खून बह रहा था लेकिन अब और इलाज ही क्या था. बाद में नाई ने अपनी भी नाक काट ली. नाई को दर्द तो वह बहुत हुआ पर नई नाक के साथ दीवाली मनाने की उत्साह में अपनी नाक पर पट्टी बांधकर वह भी सो गया.

बड़े तड़के ब्राह्मण में ऊंची आवाज में ब्राह्मणी से पूछा- “कहो सब की नई नाक कैसी आई है?”

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सब एक साथ बोले “बहुत बढ़िया.”

ब्राह्मण ने पूछा- “किसी को कोई तकलीफ तो नहीं हुई.”

सब बोले “नहीं-नहीं तकलीफ कैसी, हम सब तो बड़े आराम से सोए.”

सूरज उगा. धूप चढ़ी लेकिन नाई और नाइन के नाक नहीं आई. नाई ने तो यह कहकर अपने मन को समझाया कि हमने थोड़ी देर से नाक काटी थी इसलिए शायद कुछ देर बाद में आएगी और ब्राह्मण के मुकाबले में अच्छी आने वाली है, तो उसमे कुछ समय तो लगेगा ही.

सूर्य चढ़ने लगा पर नाई और नाइन की नाक नहीं आई. इसी बीच राजा का सिपाही नाई को बुलाने के लिए आया और बोला- “अरे! अभी तक तुम पहुंचे क्यों नहीं? राजा साहब तो तुम्हारी बाट देख रहे हैं.”

नाई नाक ही नाक में बोला- “राजा से कहना कि आपके नाई ने नई नाक के साथ दीवाली मनाने के लिए नाक काट ली है.”

सिपाही उसकी मुर्खता पर हँसता हुआ चला गया. और नाई नई नाक की बाट देखता हुआ वह लेटा रहा. पर नाई के नई नाक नहीं आई. उस दिन से वह ब्राह्मण की नकल करना भी भूल गया. इसीलिए कहा गया है कि नकल के लिए भी अकल की जरूरत पड़ती है हमें दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए. वरना हमारा परिणाम भी नकलची नाई के जैसा ही होगा.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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