तीन वरदान : हिंदी कहानी

मोहन एक ईमानदार और परिश्रमी लड़का था. बचपन में ही उसके मां-बाप गुजर गए थे. वह एक साहूकार के घर नौकरी करता था. घर के सारे काम वह अकेला ही करता था.

रोज सुबह-सुबह सबसे पहले उठ जाता और दिन भर काम करता रहता. पर कभी उसके चेहरे पर एक शिकन तक नहीं पड़ती.

जब देखो मुस्कुराता ही रहता. कितना ही मुश्किल से मुश्किल काम हो कभी किसी काम के लिए मना नहीं करता था. इस तरह मेहनत और लगन से काम करते-करते 1 साल बीत गया. पर साहूकार ने उसे तनख्वाह नहीं दी.

एक तो साहूकार था बड़ा कंजूस, दूसरा उसे डर था कि अगर मोहन को वेतन दे दिया तो कहीं वह नौकरी नहीं छोड़ दें. मोहन ने भी कभी तनख्वाह नहीं मांगी और इसी तरह मेहनत और लगन से काम करता रहा.

इसी तरह दूसरा साल भी बीत गया पर साहूकार ने तब भी वेतन का कोई जिक्र नहीं किया.

एक दिन मोहन साहूकार के पास गया और बोला- “मालिक मुझे आपके पास काम करते-करते 2 साल से भी ज्यादा हो गये है, अब मैं यहाँ काम करते-करते ऊब गया हूं और नौकरी छोड़ना चाहता हूं. कृपया मेरा हिसाब कर दीजिए.”

साहूकार ने सोचा कि मोहन बहुत ही भोला-भाला लड़का है. इसे तो थोड़े से पैसे दे देता हूं. कुछ कहेगा तो कुछ और दे देता हूं.

यह सब सोचते हुए उसने मोहन को 30 रुपये दिए और बोला- “यह लो तुम्हारा 2 साल का वेतन 15 रुपयों के हिसाब से. अपनी किस्मत को सराहो जो तुम्हें मेरे जैसा मालिक मिला वरना इतनी तनख्वाह कौन देता है.”
सीधा-साधा मोहन कुछ नहीं बोला चुपचाप पैसे जेब में रखे और अपने मालिक को प्रणाम करके चल दिया. मोहन बहुत ही खुश था. आज उसकी जेब में पूरे 2 साल की कमाई थी. उसने सोचा अब कुछ दिन आराम करूंगा, अभी तो 2 साल की कमाई है मेरे पास.

वह चलते-चलते हुए थक गया तो एक पेड़ की छांव में बैठकर सुस्ताने लगा. बैठे-बैठे मोहन की आंख लग गई.

कुछ ही देर बाद उसने महसूस किया कि कोई उसे हिला रहा है. वह आंख मलते हुए बैठा तो देखा कि सामने फटे पुराने कपड़ों में एक अत्यंत बूढ़ा व्यक्ति खड़ा था.

वह बुड्ढा मोहन को देख बोला- “मैं कई दिनों से भूखा हूं, बुड्ढा हो गया हूं, कोई काम नहीं कर सकता. मुझे कुछ पैसे दे दो तो बहुत मेहरबानी होगी.”

मोहन से उस बूढ़े व्यक्ति की दशा देखी नहीं गई, उसने तुरंत जेब से 30 रुपये निकाले और बोला- “बाबा! मेरे पास यह 30 रुपये हैं मेरे दो साल की कमाई है, इसे आप रख लो. मैं तो अभी जवान हूं, फिर कमा लूंगा.” और ऐसा कहकर 30 रुपये उसके हाथ पर रख दिए.

बुड्ढे व्यक्ति के चेहरे से खुशी दमकने लगी. वह मोहन से बोला- “बेटा तुम बहुत दयालु हो भगवान तुम्हारा भला करे. मैं तुम्हें तीन वरदान देता हूं.”

यह कहकर उस व्यक्ति ने अपनी झोली में से एक गुलेल और एक बांसुरी निकालकर मोहन को देते हुए कहा- “लो बेटा! यह गुलेल और बांसुरी दोनों करामती है. इस गुलेल का निशाना कभी नहीं चूकेगा और यह बांसुरी जब भी तुम इसे बजाओगे तो सुनने वाले नाचने लगेंगे. तुम्हारा तीसरा वरदान यह है कि तुम जिससे भी कुछ कहोगे वह तुम्हारी बात जरूर मानेगा.”

इतना कहकर बूढ़ा व्यक्ति वहा से गायब हो गया. मोहन खुशी-खुशी आगे चल पड़ा अभी वह कुछ ही दूर गया था कि उसे एक पेड़ के नीचे एक व्यक्ति खड़ा गुलेल से एक चिड़िया का शिकार करने का प्रयास करता नजर आया.

मोहन के पास पहुंचने पर वह व्यक्ति मोहन से बोला- “भैया, बहुत देर से इस चिड़िया का शिकार करने की कोशिश कर रहा हूं पर हमेशा निशाना चूक जाता है. क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?”

मोहन ने अपनी गुलेल निकाली और बोला- “यह कोई मामूली गुलेल नहीं है, यह एक जादुई गुलेल है. इसका निशाना कभी नहीं चूकता. मैं अभी चिड़िया को गिरा देता हूं.”

वहां रुक कर मोहन ने गुलेल से निशाना लगाया और चिड़िया जख्मी होकर जमीन पर गिर पड़ी. यह देख कर उस व्यक्ति का मन ललचा गया और मोहन से जादुई गुलेल छीन कर भागने लगा. मोहन उसको पकड़ने के लिए उसके पीछे भागा तभी उसको अपनी जादुई बांसुरी की याद आई.

वह रुक कर बांसुरी बजाने लगा. अब क्या था वह व्यक्ति बांसुरी की आवाज सुनते ही भागना छोड़ कर नाचने लगा. नाचते-नाचते वह एक कांटेदार झाड़ी में गिर पड़ा लेकिन मोहन ने तब भी बांसुरी बजाना जारी रखा तो वह व्यक्ति उठकर काँटों के बीच ही नाचने लगा. उसके सारे शरीर पर कांटे चुभने लगे और वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा- “मुझे माफ कर दो. अपनी गुलेल वापस ले लो. मैं तुम्हारे आगे हाथ जोड़ता हूं. भगवान के लिए बांसुरी बजाना बंद कर दो. वरना मैं मर जाऊंगा.”
मोहन को उस पर दया आ गई. मोहन ने बांसुरी बंद कर उस व्यक्ति से पूछा- “अब तो कभी चोरी नहीं करोगे.”

“नहीं-नहीं, मैं कभी चोरी नहीं करूंगा. मुझे माफ कर दो. मेरे पास एक मोहरों से भरी थैली है. वह ले लो पर बांसुरी न बजाओ.” यह कहकर उस व्यक्ति ने मोहन को एक मोहरो से भरी थेली पकड़ा दी. उसने मोहन की गुलेल भी वापस कर दी और मन ही मन मोहन को गाली देता हुआ सीधा कचहरी पहुंचा. रोते-रोते हकीम से बोला- “हुजूर मैं लुट गया, मैं लुट गया. हुजूर! एक बदमाश ने मुझे मार-मार कर अधमरा कर दिया और मुझसे मेरी मोहरों की थैली तथा मेरी गुलेल छीन ली.”

“कौन है वह बदमाश? कहां रहता है?” हकीम ने पूछा.

“यह तो मैं नहीं जानता हुजूर, पर उसके पास एक गुलेल और एक बांसुरी है. उन्हीं से उसे पहचाना जा सकता है.” वह व्यक्ति बोला.

मोहन अभी तक कुछ ही दूर पहुंचा था कि सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया और हकीम के पास ले आए. हकीम मोहन से बोला- “देखने में तो तुम शरीफ लगते हो. बताओ तुमने इस व्यक्ति को क्यों मारा पीटा और इसकी गुलेल और मोहरों की थैली क्यों छीनी.”

“यह झूठ बोलता है हुजूर, मैंने तो इसे हाथ भी नहीं लगाया और मोहरो की थैली तो इस ने खुद मुझे दी थी. इसे मेरा बांसुरी बजाना अच्छा नहीं लग रहा था.” मोहन ने हकीम से कहा.

मोहन की बात पर हाकिम को यकीन नहीं आया. भला बांसुरी बजाना बंद करवाने के लिए कोई मोहरों की थैली क्यों देगा. वहां के कानून के मुताबिक हकीम ने मोहन की फांसी को सजा सुनाते हुए पूछा- “मरने से पहले तुम्हारी कोई आखिरी इच्छा है तो बताओ.”

“हुजूर मैं मरने से पहले कुछ देर बांसुरी बजाना चाहता हूं” मोहन बोला.

“नहीं हुजूर! भगवान के लिए इसे बांसुरी मत बजाने देना. वह व्यक्ति चिलाया.

लेकिन हकीम मोहन की बात कैसे नहीं मानता. मोहन को उस बूढ़े व्यक्ति ने वरदान दिया था कि जिससे भी तुम कुछ कहोगे वह तुम्हारी बात जरूर मानेगा. हकीम ने मोहन को बांसुरी बजाने की अनुमति दे दी. जैसे ही मोहन ने बांसुरी पर धुन छेड़ी वहां उपस्थित हर व्यक्ति नाचने लगा. जैसे-जैसे बांसुरी की आवाज तेज होती जाती सबका नाचना भी तेज होता जाता. काफी देर तक यही क्रम चलता रहा.

सब थक कर बेहाल हो गए, तब हकीम गिड़गिड़ाकर बोला- “मैं तुम्हें आजाद करता हूं, पर भगवान के लिए बांसुरी बजाना बंद कर दो.”

“हुजूर! अब तो आपने देख लिया जैसे आपने मेरी बांसुरी बजाना बंद करवाने के लिए मुझे प्राण दान दे दिया उसी तरह इस व्यक्ति ने भी मुझे खुद ही मोहरों की थेली दी थी.”

हकीम ने तुरंत उस व्यक्ति को जेल में डाल दिया और मोहन को छोड़ दिया. क्योंकि अब तक हाकिम भी माजरा समझ चुका था.

कहानी से शिक्षा:

  • परोपकारी व्यक्ति हमेशा सुखी रहता है अतः हमें परोपकारी बनना चाहिए.
  • हमें दूसरों की चीजों, संपत्तियों को देख कर व्यर्थ लालच नहीं करना चाहिए, बल्कि दूसरे की चीजो को मिट्टी तुल्य समझना चाहिए.
  • हमें सदा न्याय के रास्ते पर चलना चाहिए.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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