घरवालों को खुद पर भरोसा दिलाएं : हिंदी कहानी Whatsapp

घरवालों को खुद पर भरोसा दिलाएं : हिंदी कहानी Whatsapp

घरवालों को खुद पर भरोसा दिलाएं : हिंदी कहानी Whatsapp

मैं बचपन से ही चाहती थी कि मैं कोई अलग पढाई करू इसीलिए मेरा झुकाव हमेशा ही पत्रकारिता की ओर रहा. पर सबसे पड़ी दिक्कत यह थी कि हमारे शहर में पत्रकारिता कोई कॉलेज नहीं था और 12वीं के बाद जैसे ही बाहर रहकर पढने की बात आती तो सभी रिश्तेदारों और घरवालों को मेरा ख्याल आ जाता. सभी रिश्तेदार मेरे मम्मी-पापा से कहते कि पत्रकारिता लड़कियों के लिए नहीं है वहां देर रात तक काम करना पड़ता है और लड़को के साथ रहना पड़ता है. लड़की को बस साधारण पढाई ही करनी चाहिए.

सभी दांव-पेचों के बाद आख़िरकार मेरा दाखिला शहर के ही किसी कॉलेज में करवाना तय हो गया. मेरे न चाहते हुए भी मुझे कंप्यूटर में ग्रेजुएशन करनी पड़ गई. एक तरफ घरवालों की बात भी सही थी क्योंकि मेरी सुरक्षा की सारी जिम्मेदारी उन पर ही थी.

जैसे-तैसे 3 साल पुरे हुए. अब बारी थी मेरी पोस्ट ग्रेजुएशन की. रिश्तेदारों का हस्तक्षेप फिर से शुरू. और सभी ने सुझाव दिया की मुझे एमबीए करनी चाहिए. लेकिन अबकी बार में खुद फैसला लेना चाहती थी. और मेने बिना किसी से कुछ कहे पत्रकारिता के लिए हिने वाली प्रवेश परीक्षा की तैयारी करनी शुरू कर दी. मैंने अपने मम्मी पापा से कह दिया कि अगर मेरा सिलेक्शन हो गया तब तो ठीक वरना आप जो चाहे वही पढाई.

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मैं अपनी परीक्षा की तैयारी में जुट गयी. इस बीच पापा जी को भी समझ में आ गया कि आख़िरकार मेरा भविष्य किसमें सही रहेगा. कई बार पापा मुझसे मीडिया और एंकरिंग की बाते करते.

मैंने पापा को समझाया कि जैसा लोग कहते है वैसा बिलकुल नहीं है. फिर भी जब आपको लगे की मेरा फैसला गलत है तो आप जब कहोगे मैं पत्रकारिता छोड़ दूंगी. सबसे बड़ी बात में रात की शिफ्ट में काम ही नहीं करुँगी. बस एक बार मुझे पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन कर लेने दो.
कुछ ही दिनों में मेरी परीक्षा का रिजल्ट आ गया. मैं पास हो गयी और मुझे काउंसलिंग के लिए बुला लिया गया. दो-एक दिनों में पापा ने भी हाँ भर दी.

मैंने पोस्ट ग्रेजुएशन किया और मेरी नौकरी भी लग गयी.

आज भी सभी रिश्तेदार हमारे घर आते है और पापा से पत्रकारिता की परीक्षा की तारीख पूछते है. और मुझसे भी फ़ोन पर जानकारी लेते है.
मैं खुश हूँ क्योंकि अपनी मनपसंद पढाई करने के बाद अपनी ही पसंद की नौकरी भी कर रही हूँ.

दरअसल ऐसे कई मौके आते है जब हमे लगता है कि घरवाले हमे समझ नहीं रहे है. लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं होता. अगर हम थोडा सा प्रयत्न करें तो सब-कुछ ठीक हो सकता है. बस घरवालों को खुद पर भरोसा दिलाएं.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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