घमण्डी जमीदार : हिंदी कहानी

प्राचिन यूनान के एंटिका प्रान्त में एक जमीदार रहता था. वह जमीदार तहुत घमण्डी था. उसे अपनी जागीर पर बहुत गर्व था. जो कोई भी उसके पास आता उसके सामने अपनी सम्पन्नता की डींग हाकने लगता.

एक बार वह एक संत के पास गया. वह चाहता था कि संत उसके वैभव की बडाई करें. संत के लिए यह सम्भव नहीं था. पहले तो वे उस घमण्डी जमींदार की बातें सूनते रहे. फिर अपनी अलमारी से दुनिया का नक्शा निकाला. उसे जमीन पर फैलाकर जमींदार से पूछा, “क्यों भाई इसमें यूनान कहां है?”

घमण्डी जमीदार ने नक्शे पर  उंगली रखकर बता दिया.

संत ने फिर प्रश्न किया, “इसमें तूम्हारा ऐटिका प्रांत कहां है?”

घमण्डी जमीदार काफी देर तक नक्शे मे देखता रहा. तब कहीं जाकर मूश्किल से अपना एंटिका प्रान्त ढूंढ सका.

यह देख कर संत ने फिर प्रश्न किया, “इसमें तूम्हारी जागीर कहां है?”

इस पर वह घमण्डी जमींदार परेशान होकर बोला, “श्रीमान! इस नक्शे में इतनी छोटी सी जामीर कहां दिखाई जा सकती ?”

तब संत ने मूस्कराकर कहा, “भाई, फिर तूम अपनी इतनी छोटी जामीर का इतना घमंड क्यों करते फिरते हो. तूम्हारी जिस जागीर के लिए इस नक्शे में एक बिन्दू भी नहीं दिखाया जा सकता, उसके लिए इतना झूठा गर्व करना व्यर्थ है.”

संत की बात सुनकर जमींदार पानी पानी हो गया. उसने भविष्य में घमंड नहीं करने की कसम खाई.

शिक्षा : हमे घमंड नहीं करना चाहिए.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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