गुलाब के फूल : तेनाली राम की कहानियां

तेनाली राम की पत्नी को गुलाब के फूलों की शौकीन थी. वह अपने बेटे को चोरी-चोरी अपने राजा के बाग में भेजा करती. वह वहां से एक-दो गुलाब के फूल तोड़ लाता, जिन्हें तेनाली राम की पत्नी सजते समय अपने बालों में लगा लिया करती.

तेनालीराम दरबार में सबसे बुद्धिमान मंत्री था. इसलिए दरबार में तेनाली राम के कई शत्रु थे. उन्हें किसी तरह यह बात पता चल गई कि तेनालीराम क बेटा चोरी करके बाग से फूल ले जाता है. लेकिन राजा से कहने का साहस उनमें नहीं था. वह जानते थे कि तेनाली राम अपनी सूझबूझ के बल पर अपने बेटे को बचा लेगा और उन्हें बेवकूफ बनना पड़ेगा.

उन्होंने तेनालीराम के बेटे को रंगे हाथों पकड़ने की योजना बनाई. एक दिन उन्हें अपने जासूसों से पता चला कि तेनाली राम का बेटा फूल तोड़ने के लिए बगीचे में आया हुआ है. फिर क्या था, उन्होंने राजा से शिकायत की ओर कहा, “महाराज, हम अभी उस चोर को आपके सामने उपस्थित करेंगे.”

वे लोग बगीचे के मुख्य द्वार पर जाकर खड़े हो गए. बाग के दूसरे सभी द्वारों पर भी आदमी खड़े कर दिए गए. उन्हें तेनाली राम के बेटे के पकड़े जाने का इतना यकीन था कि वे तेनाली राम को भी अपने साथ ले गए थे. उन्होंने बड़ा रस ले लेकर तेनाली राम को बताया कि अभी उसका बेटा रंगे हाथों पकड़ा जाएगा और उसे राजा के सामने पेश किया जाएगा. उनमें से एक बोला, “कहो तेनाली राम अब तुम्हें क्या कहना है?”

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“मुझे क्या कहना है?” तेनाली राम ने चिल्लाते हुए कहा, “मेरे बेटे के पास अपनी बात कहने के लिए जबान है. वह स्वयं ही जो कहना होगा, कह लेगा. मेरा अपना विचार तो यह है कि वह अवश्य मेरी पत्नी की दवा के लिए जड़ें लेने गया होगा, गुलाब का फूल लेने नहीं.”

तेनाली राम के बेटे ने बगीचे के अंदर ये शब्द सुन लिए, जिन्हें तेनाली राम ने उसे सुनाने के लिए ही ऊंची आवाज में कहा था. वह अपने पिता की बात का मतलब समझ गया. उसने झट से गुलाब का फूल वहाँ छिपा दिया. फिर उसने बाग में से कुछ जड़ें इकट्ठी की ओर उन्हें झोली में डालकर बाग के द्वार तक पहुंचा. तेनाली राम के शत्रु दरबारियों ने उसे एकदम पकड़ लिया और उसे राजा के पास ले गए.

“महाराज, इसने अपनी झोली में आपके बाग से चुराए गए गुलाब के फूल छिपा रखे हैं.” दरबारियों ने कहा. “गुलाब के फूल, कैसे गुलाब के फूल?” तेनालीराम के बेटे ने कहा, “ये तो मेरी मां की दवा के लिए जड़ें हैं.” उसने झोली खोलकर जड़ें दिखा दीं. दरबारियों के सिर शर्म से झुक गए. राजा ने तेनाली राम से क्षमा मांगी और उसके बेटे को बहुत-सी भेंट देकर घर भेज दिया.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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