गड़ा हुआ खजाना : परिश्रम का परिणाम

हुत पुरानी बात है रामगढ़ नामक गांव में एक आदमी रहता था. उसका नाम था गोपीनाथ. गोपीनाथ बहुत ही आलसी और कामचोर आदमी था. इसीलिए गांव के लोग कई बार उसे समझा चुके थे कि कुछ काम-धाम किया कर परंतु वह पत्थर की तरह टस से मस नहीं हुआ. लोग समझाते-समझाते थक गए और इसके बाद समझाना भी बंद कर दिया.

दिन-रात बैठे-बैठे वह एक ही बात सोचता कि काश मुझे गड़ा हुआ खजाना मिल जाता तो अपने लिए शानदार महल बनवाता, ढेर सारे नौकर रखता और आराम से रहता.

गोपीनाथ की पत्नी ममता बहुत परेशान थी. बेचारी दिनभर मजदूरी मेहनत करके अपने बच्चों और पति का पेट भरती थी ममता यदि गोपीनाथ को कुछ काम करने की सलाह देती तो वह उसे मारने-पीटने लगता था. उसके पास कुछ खेत भी थे परंतु मेहनत के अभाव में बंजर से हो गए थे.

एक बार भीषण अकाल पड़ा चारों ओर हाहाकार मच गया. लोग भूखों मरने लगे. ममता बेहद चिंतित थी मगर गोपीनाथ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. वह पहले की तरह ख्यालों की दुनिया में खोया रहता. ममता ने जो थोड़ी बहुत रकम बचा कर रखी थी वह भी खत्म होने लगी.

उसी गांव में एक संत आए वह बड़ी ही मीठी वाणी से प्रवचन करती. गांव के लोग बड़ी श्रद्धा से उनका प्रवचन सुनते थे. एक दिन ममता संत के पास गई और अपना दुखड़ा कह सुनाया.

उसकी बात सुनकर संत मुस्कुराए और बोले कि बेटी धीरज रखो, सब ठीक हो जाएगा ऐसा करो कि अपने पति को मेरे पास भेजो. उससे कहना कि संत तूने गड़े हुए खजाने का पता बताने बुला रहे हैं. ममता प्रणाम करके चली गई और घर जाकर अपने पति से वही बात कह दी जो

संत ने बताई थी. गोपीनाथ दौड़ा दौड़ा संत के पास गया.

“महाराज-महाराज! मुझे जल्दी से गड़े हुए खजाने का पता बताइए.”

संत बोले, “धैर्य से बेठ बेटा! मैं तुम्हें खजाने का पता बताता हूं.”

“जल्दी कीजिए महाराज! मेरी व्याकुलता बढती जा रही है” गोपीनाथ ने कहा.

“उस खजाने को प्राप्त करना इतना आसान नहीं है. पुत्र, जी-तोड़ मेहनत करनी होगी” संत बोले.

“मैं कुछ भी करने को तैयार हूं महाराज!” गोपीनाथ उतावला हुआ जा रहा था.
संत कुछ देर सोचते रहे फिर बोले कि तेरे पास कोई खेत है क्या?
गोपीनाथ ने हां में सिर हिलाया तो संत ने कहा कि चल मैं तुझे वहीं बताऊंगा. संत गोपीनाथ को लेकर उसके खेत की तरफ चल पड़े. वहां पहुंच कर उन्होंने एक समतल जगह पर बहुत बड़ा वृत्त खींच कर कहा कि देखो वत्स इस वृत्त के अंदर ही वह गड़ा हुआ खजाना है. यहां खुदाई आरंभ कर दो हां इतना ध्यान रखना कि यदि तूने परिश्रम से जी चुराया तो कुछ भी हाथ नहीं लगेगा.

“मैं आपकी आज्ञा अनुसार ही काम करुंगा महाराज, मेहनत से जरा भी जी नहीं चुराऊंगा” गोपीनाथ ने कहा और घर से फावड़ा ला कर खुदाई आरंभ कर दी. उसके दिमाग में तो गड़े हुए खजाने पाने का भूत सवार था. वह दिन रात मेहनत कर जमीन की खुदाई करता रहा. धीरे-धीरे वह गड्ढा कुआं का रूप लेता जा रहा था तभी एक दिन उसने जमीन पर फावड़ा मारा तो पानी का फव्वारा फूट पड़ा.

गोपीनाथ घबराया हुआ संत के पास पहुंचा और बोला, “महाराज-महाराज! वहां खजाना तो नहीं मिला इसका उल्टा वह गड्ढा पानी से भर गया है. अब वह खजाना मुझे कैसे मिलेगा.”

“धीरज रख बेटा तो खजाने के पास ही पहुंच गया है” संत जी बोले. “अब तू खेत की जुताई कर बीज बो दे और उसी कुएं के पानी से सिंचाई कर पौधों से सोने की बालियां निकलेगी जिससे तू मालामाल हो जाएगा.
गोपीनाथ को युक्ति बता संत जी गांव छोड़कर अन्य जगह चले गए.

गोपीनाथ के सिर से खजाना पाने का भूत अभी तक नहीं उतरा था. उसने खेत की जुताई कर बीज बो दिए और उसी कुवे से पानी से सिंचाई करने लगा. बीज से पौधे निकले और समय के साथ साथ बढ़ने लगे. लहलहाती फसलों को देखकर गोपीनाथ का मन झूम उठता और धीरे-धीरे उसके मस्तिष्क से गड़ा हुए खजाना पाने का पागलपन दूर हो गया. वह पूरी लगन से फसल की देखभाल में लग गया.
अकाल के बावजूद भी उसके खेतो में सोलह आने फसल हुई. उस के खेतो में हुई फसल उसके कठिन परिश्रम का ही फल था. अब वह मेहनत का मूल्य समझ चुका था.

एक दिन वही संत पुनः उसी गांव में आये और सबसे पहले गोपीनाथ के खेत पर गए और बोले कि तुझे खजाना मिल गया बेटा.
गोपीनाथ संत के पैरों में गिर पड़ा और कहने लगा कि आपने तो मेरी आंखें खोल दी. मेहनत से बड़ा कोई खजाना नहीं है. मैं मेहनत के महत्व को अच्छी तरह समझ गया हूं.
इस प्रकार गोपीनाथ गांव का सुखी और संपन्न किसान बन गया.

शिक्षा: आलस्य हमारा सबसे बड़ा शत्रु है, अतः हमें आलस्य त्याग कर स्वावलंबी इंसान बनना चाहिए.
हमें मेहनत से जी नहीं चुराना चाहिए सच्ची लगन और कठिन परिश्रम से किए गए कार्यों का फल हमेशा मीठा होता है और इसका फल अवश्य ही मिलता है चाहे वह देर से ही सही.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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