किसान की शिक्षा : हिंदी Whatsapp नैतिक कहानी

बहुत समय पहले की बात है । किसी गांव में एक किसान रहता था। किसान के तीन लड़के थे तीनों लड़के बिल्कुल भी मेहनत नहीं करते थे ।उन्हें देख किसान बहुत परेशान रहता था। 1 दिन किसान के मन में आया कि लड़कों को कुछ ऐसी शिक्षा दी जाए कि समय आने पर वह जिंदगी में सफल हो सके और अपने परिवार को संभाल सके । इसी विचार के साथ किसान ने तीनो लड़कों को अपने पास बुलाया और कहा, कि मैं अपने खेत में नाशपाती का वृक्ष लगाना चाहता हूं , यहां दूर-दूर तक किसी भी गांव में नाशपाती का वृक्ष नहीं है। मैं चाहता हूं कि तुम सब चार चार महीने के अंतराल पर इसी वृक्ष की तलाश में जाओ और पता लगाओ कि वह कैसा होता है।

किसान की आकांक्षा सुनकर तीनों लड़के बारी-बारी से उस वृक्ष की तलाश में गए, वहां जाकर उसे देखकर लौट आए, सभी लड़कों के लौट आने पर किसान ने अपने पास बुलाया सभी को और कहा कि बताओ ,तुम क्या क्या देख कर आए थे ।

पिता की बात सुनकर पहले वाला लड़का बोला, “पिताजी वृक्ष तो बिल्कुल टेढ़ा-मेढ़ा और सूखा हुआ है।”

“नहीं-नहीं वह तो बिल्कुल भी सूखा नहीं. वह तो हरा भरा था. बस उसमें एक कमी थी. उस पर एक भी फल नहीं लगा था।” दूसरे लड़के ने पहले लड़के को बीच में रोकते हुए कहा।

फिर तीसरा बोलने लगता है, “आप भी भाई कोई गलत पेड़ देखकर आए हो क्योंकि मैंने जो पेड़ देखा वह पूरा फलों से लदा हुआ था ।’

तीनों लड़के आपस में अपनी बात को लेकर विवाद करने लगे। तभी किसान अपने लड़कों को चुप रहने को कहता और बोलता है, “बच्चो!तुम्हें आपस में बहस करने की कोई आवश्यकता नहीं है, दरअसल तुम तीनों ही वृक्ष का सही  वर्णन कर रहे हो, भला में नहीं जानता कि ,कैसा होता है नाशपती का वृक्ष मैं पिछले 50 साल से खेती में हूं. मैंने तो जान बूझकर तुम्हें अलग-अलग मौसम ने वृक्ष खोज ने भेजा और तुमने जो वृक्ष देखा वह मौसम के अनुसार देखा. मैं चाहता हूं इस अनुभव के आधार पर,तुम मेरी तीन बातें गांठ बान्ध लो।

पहली- किसी चीज के बारे में सही और पूर्ण जानकारी चाहिए तो तुम्हें उसे लंबे समय तक देखना चाहिए और परखना चाहिए ,फिर चाहे वह कोई भी विषय हो या कोई भी व्यक्ति ही क्यों ना हो।

दूसरी – हर बार मौसम एक जैसा नहीं होता, जिस प्रकार वृक्ष मौसम के अनुसार सूखता हरा-भरा और फलों से लदा रहता है,उसी प्रकार मनुष्य के जीवन में उतार चढ़ाव आते रहते हैं,अगर तुम  कभी भी बुरे दौर से गुजर रहे हो तो अपनी हिम्मत और साहस बनाए रखना, समय अवश्य बदलता है।

तीसरी-  अपनी बात को सही मानकर खड़े मत रहो, अपना दिमाग खोलो और दूसरों के विचारों को भी जानो, यह संसार ज्ञान उसे भरा है, चाह कर भी तुम सारा ज्ञान अर्जित नहीं कर सकते क्योंकि भ्रम की स्थिति में किसी ज्ञानी व्यक्ति से सलाह लेने में संकोच न करें।

तीन लड़के पिता की बात सुनकर, मेहनती बनने लगे और अपनी आने वाली जिंदगी व परिवार के बारे में सोचने लगे ।

शिक्षा – इस कहानी में हमें यह शिक्षा मिलती है,कि हमें जिंदगी में कड़ी मेहनत करनी चाहिए ताकि बाद में पछताना न पड़े।

लेखिका – स्वीटी मिड्ढा

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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