किसान का कुआं

किसान का कुआं : एक बार एक किसान अपनी पत्नी के साथ रहता था. वह बहुत ही परिश्रम से खेती करता था. उसके खेतों में पानी की सदैव कमी रहती थी अत: उसने अपने खेत में कुआं खोदने की ठानी. उसने खेत के एक कोने में बड़े परिश्रम से कुआं खोद दिया परंतु वहाँ पानी नहीं मिला. वह बहुत दु:खी हुआ. उसकी पत्नी ने कहा कि ब्राह्मण जी को बुलाकर पत्र आदि सधवा कर पूछ लेते है कि पानी कहाँ है?

किसान ने पत्नी को कहा कि मैं किसान हूँ और मुझे ही नहीं पता तो वह ब्राह्मण जिसने न खेती करी और न कुछ खेती के बारे में जानता है वह क्या पानी के बारे में बताएगा.

किसान ने खेत के दूसरे कोने में भी एक कुआं खोद दिया परंतु यहाँ भी पानी नहीं मिला. किसान अत्यंत दु:खी हुआ. पत्नी ने फिर समझाया परंतु किसान कहाँ मानने वाला था. उसे पता था कि यह सब ढोंग है और यहाँ पानी था ही नहीं. किसान ने पूरी मेहनत से एक तीसरी जगह पर कुआं खोद दिया परंतु दुर्भाग्यवश यहाँ भी पानी की एक बूंद भी नहीं निकली.

अब तो हद हो गयी थी. पत्नी ने बहुत ज़ोर देकर फिर कहा- “देखा यदि ब्राह्मण से पूछ लेते तो पानी निकाल आता परंतु तुम्हारे हठ के कारण यह सब हुआ. मैं ब्राह्मण को बुला लेती हूँ.”

किसान बुद्धिमान था उसने कह दिया कि बुला लो. अगले दिन ब्राह्मण अपने दो शिष्यों के साथ आया. किसान की पत्नी ने उनके लिए खीर बनाई और किसान को चीनी मिलाकर खीर देने को कहा. किसान ने ब्राह्मण के दोनों शिष्यों की खीर के ऊपर चीनी डालकर खीर दी जबकि ब्राह्मण की खीर के नीचे पहले चीनी और ऊपर खीर डालकर भोजन परोसा. दोनों शिष्य मजे से खीर खा रहे थे. ब्राह्मण ने भी खीर खानी प्रारम्भ की. उसने खीर बिना चीनी के परोसी हुई लगी.

उसने पास खड़े बुद्धिमान किसान से कहा “यजमान, खीर में चीनी तो डाल दो.” पास में खड़े किसान ने पाखंडी ब्राह्मण को ज़ोर से एक ज़ोर का तमाचा मारा और कहा “अरे धूर्त, ब्राह्मण ऐसी असंभव बातें नहीं करते बल्कि वे तो सत्य, वैदिक, धर्म के ईश्वरीय ज्ञान की शिक्षा करते है.”

ब्राह्मण कुछ समझ नहीं पाया कि यह उसके साथ क्या हो गया. इतने में किसान ने कहा कि मूर्ख थाली में खीर के नीचे चीनी डाल रखी है. तुझे दो अंगुली खीर के नीचे चीनी तो दिखी नहीं तू मेरे खेत के 40-50 फुट नीचे पानी क्या देखेगा.

शिक्षा: जन्म से कोई ब्राह्मण नहीं होता बल्कि वेदों के विद्वान को ही ब्राह्मण कहते है. चाहे वह किसी भी कुल में जन्मा हो. राष्ट्र की सभी समस्याओं का, वैदिक धर्म के पतन व आर्यावर्त राष्ट्र की गुलामी का मुख्य कारण यही अंधविश्वास ही है. यदि हमारे देश के सभी धर्मप्रिय सज्जन इसी आर्य किसान की भांति हो जावे तो यह पोपलीला खत्म होकर आर्य एक हो जाएंगे ओर अन्य अधर्मियों को रातों-रात जड़-मूल से नष्ट करने में सक्षम हो जावे.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

comments
  • Aapki har kahani mujhe bahut achhi lagti hai. Thanks for these story.

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