अनोखी सूझ : बुद्धिवर्धक कहानी

एक बार की बात है. जब देवताओं और दानवो में युद्ध होता रहता था. एक बार देवता और दानव दोनों पक्ष मिलकर एक प्रजापति के पास गए.

वहां आकर बोले, “महोदय हम दोनों आपके पास एक प्रश्न का उत्तर मांगने यहाँ उपस्थित हुए हैं. क्या आप हमें बताएंगे कि हम दोनों में से अधिक बुद्धिमान कौन है?”

उनकी बात सुनकर प्रजापति सोचने लगे कि इन में से किसी को बुद्धिमान कैसे बताऊं. यदि दानवो को बुद्धिमान बताते हैं, तो देवता नाराज हो जाएंगे और यदि देवताओं को बुद्धिमान बताते हैं तो दानव नाराज हो जाएंगे.

फिर उन्होंने एक तरकीब निकाली और दोनों पक्षों को भोजन पर आमंत्रित कर कल के दिन आने को कहा.

दूसरे दिन दोनों पक्ष भोजन के लिए पहुंचे. दोनों को अलग-अलग कमरे में भोजन के लिए बिठाया गया. वहां मिष्ठान से भरे थाल भिजवा दिए गए. प्रजापति दानवो के कमरे में गए और कहा कि तुम्हें यह मिष्ठान कोहनी को बिना मोड़े खाना है. इससे ही तुम्हारी बुद्धि की परीक्षा ली जाएगी. उसके बाद उन्होंने देवताओं के सामने भी यही शर्त रखी.

दोनों पक्ष प्रजापति की बात सुन परेशान हुए. दोनों पक्षों को प्रजापति की आज्ञा का पालन करना था. देवताओं ने एक उपाय सोचा, सभी देवता एक-दूसरे के आमने-सामने बैठ गए और लड्डू उठा-उठा कर एक-दूसरे के मुंह में देने लगे. कुछ देर में थाल खाली हो गये. देवताओ ने बिना किसी परेशानी के शांतिपूर्वक आज्ञा के मुताबिक भोजन समाप्त किया.

दूसरी ओर दानव अपने कमरे में परेशान थे. सोचने लगे कि बेकार ही यहां आए और परीक्षा देनी पड़ी. फिर उन्होंने लड्डू लिए और ऊपर उछालने लगे. लड्डू जब नीचे आते तो अपना मुंह खोल लेते, परन्तु लड्डू उनके मुह के बजाये जमीन पर गिर जाते और चूर-चूर हो जाते. आधे से अधिक लड्डू नीचे गिरे. कुछ ही उनके मुंह में गए. वहां कमरे में चिल्लाने और लड़ाई-झगड़े की आवाज आने लगी.

सारी स्थिति स्पष्ट थी. प्रजापति ने कहा कि देवता ही श्रेष्ठ है. जानते हो क्यों? इसीलिए कि उन्होंने सहयोग की भावना से काम लिया. खुद भी खाया, और दूसरों को भी खिलाया. यह थी उनकी विशेषता. उन्होंने बुद्धि से काम लिया, सूझबूझ दिखाई. दूसरी तरफ दानवो ने आज्ञा का पालन किया परंतु बुद्धि से काम नहीं लिया. न तो उन्होंने खुद खाया और न ही खाने दिया. लड्डू तो बिगड़े ही, पेट भी नहीं भरा.

इस तरह दानवो की हार हुई और देवता अपनी अनोखी सूझ और बुद्धि से जीत गए.

कहानी से शिक्षा– जिसके पास बुद्धि है, उसी के पास बल है.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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