अच्छा या बुरा : नजरिये का महत्त्व

अच्छा या बुरा : नजरिये का महत्त्व:  एक बार एक शहर में एक महिला की दो पुत्रियां थी कल्पना एवं अल्पना. कल्पना बड़ी थी और अल्पना छोटी. कल्पना बहुत ही शांत, साधारण एवं बुजुर्गों का सम्मान एवं छोटों को प्यार करने वाली थी जबकि अल्पना बहुत ही दुष्ट प्रकृति एवं बुजुर्गों का अपमान करने वाली थी.

कुछ समय बाद उनकी मां स्वर्ग सिधार गई एंव उन दोनों की शादी एक ही घर में हो गई.
ससुराल में दोनों बहने जाने लगी एवं कुछ समय बाद ससुराल में झगड़े होने लगे. बड़ी बहन का व्यवहार अच्छा था.

उसका घर अच्छा चल रहा था जबकि छोटी बहन का घर बर्बाद होने की कगार पर था. वह अपने पति एवं बुजुर्गों से दुर्व्यवहार करती.

कुछ समय बाद पंचायत हुई एवं पंचायत में लोगों ने छोटी बहन से पूछा- “तुम जैसा व्यवहार करती हो ऐसा व्यवहार तुमने कहां से सीखा. तुम्हारी बहन तो तुम्हारे विपरीत है.”

अल्पना ने कहा- “इसमें मेरी गलती नहीं है. मैंने यह सब अपनी मां से सीखा. वह भी मेरे पिताजी एवं अन्य के साथ ऐसा ही व्यवहार करती थी. मैं भी उनको देखकर ही जवान हुई हूं.”

पंचायत ने फिर बड़ी बहन से पूछा- “तुम्हारी मां जब ऐसा व्यवहार करती थी तो तुमने इतना अच्छा एवं साथ व्यवहार कहां से सीखा?”

कल्पना ने कहा- “मेरी मां बुरी थी. वह हमेशा लड़ाई झगड़ा करती थी एवं उनके साथ भी ऐसा ही होता था जैसा आज मेरी छोटी बहन के साथ हो रहा है.

मैंने हमेशा यही देखा और यह सोचा कि मैं ऐसी नहीं बनूंगी.यह केवल हमारी सोच का ही परिणाम है.”
लोगों ने छोटी बहन को बड़ी बहन की तरह बनने को कहा एवं फिर वह दुबारा पंचायत में नहीं आए.

शिक्षा: हम अच्छे बने या बुरे; यह हमारी सोच का परिणाम है. हमारी सोच सकारात्मक एवं रचनात्मक हो सकती है. मनुष्य कभी भी अच्छा या बुरा नहीं होता. अच्छा या बुरा उनकी सोच का परिणाम मात्र है.

Bhati Neemla

हेल्लो दोस्तों! 'हिंदी में स्टोरी' पर आपका स्वागत है. मेरा नाम BS भाटी नीमला है. यह ब्लॉग उन पाठको के लिए बनाया गया है जो हिंदी कहानियों में रूचि रखते है. कृपया अपने बच्चो को ये कहानिया पढने को जरूर दे ताकि उनमे एक सकारात्मक परिवर्तन हो सके.

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